History

📜 हमारा इतिहास
श्री हरिः राधामाधव कामधेनू सेवा ट्रस्ट (चुरू) की स्थापना वर्ष 2016 में गौवंश की सेवा, संरक्षण और संवर्धन के लिए हुई। इस ट्रस्ट की प्रेरणा परम श्रद्धेय बाल व्यास श्री आकाश जी महाराज को भगवान श्री राधामाधव की दिव्य कृपा से मिली।
भारत की प्राचीन संस्कृति में गाय को विश्वमाता कहा गया है। वेदों में वर्णित है – “गावो विश्वस्य मातरः” अर्थात् गाय संपूर्ण जगत की माता है। गोवंश न केवल धार्मिक दृष्टि से पूज्य है, बल्कि जीवनदायिनी शक्ति का स्रोत भी है। किंतु आधुनिक समय में स्वार्थ और औद्योगिक लालसा के कारण प्रतिवर्ष करोड़ों गौवंश की उपेक्षा और निर्मम हत्या हो रही है। यह केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे मानव समाज के लिए एक विनाशकारी कलंक है। इसी पीड़ा से उद्वेलित होकर इस पवित्र अभियान का आरंभ हुआ।
🌿 खारिया गोशाला की पावन भूमि
इस रचनात्मक महाअभियान का केंद्र चुना गया – खारिया ग्राम (जिला चूरू, राजस्थान)। यह भूमि सदियों से नाथ संप्रदाय के संतों की तपस्थली रही है और गोपालन संस्कृति के लिए प्रसिद्ध रही है। यहाँ देशी, राठी और गीर नस्ल की गायों का संगम आज भी मिलता है। भीषण गर्मी और वर्षा के अभाव के बावजूद यह क्षेत्र दूध-दही और घी की प्रचुरता के कारण जाना जाता है।
🚩 महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पड़ाव
श्रावण मास, संवत् 2072 (2016) – ध्यान और साधना के उपरांत श्रद्धेय आकाश जी महाराज ने खारिया भूमि पर गौवंश संरक्षण का दिव्य संकल्प लिया।
29 जुलाई 2016 – खारिया गोशाला (हाल) के मध्य श्री आकाश जी ने स्वयं केसरिया ध्वज फहराकर राष्ट्रव्यापी रचनात्मक गोसेवा महाअभियान की घोषणा की।
2016 – “श्री हरिः राधामाधव कामधेनू सेवा ट्रस्ट” की स्थापना औपचारिक रूप से की गई।
2017 – भूमि क्रय कर खारिया के बीहड़ क्षेत्र में गोशाला का निर्माण कार्य प्रारंभ।
हनुमान जयंती 2017 – गोप्रवेश संस्कार के साथ इस महाप्रकल्प का शुभारंभ।
गोपाष्टमी 2017 – इस सेवा धाम को आधिकारिक नाम मिला – “खारिया गोशाला (खारिया गोतीर्थ)”।
🙏 हमारी प्रेरणा और संकल्प
गोमाता केवल धर्म और संस्कृति की आधारशिला ही नहीं, बल्कि समूचे पर्यावरण और मानव जीवन के लिए अमृत तुल्य हैं। एक गाय अनेकों जीवों का पोषण करती है और उसके प्रत्येक अंग का उपयोग समाज के लिए हितकारी है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति ने गाय को माता का दर्जा दिया है।
आज जब 95% से अधिक गोवंश उपेक्षा, अत्याचार और वध का शिकार हो रहा है, तब श्री हरिः राधामाधव कामधेनू सेवा ट्रस्ट ने संकल्प लिया है कि –
कोई भी गौवंश निराश्रित या बेसहारा न रहे।
आधुनिकता और पारंपरिक गोपालन संस्कृति का समन्वय करके गायों को सुरक्षित आश्रय प्रदान किया जाए।
गोवंश संरक्षण को धार्मिक, सांस्कृतिक ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दिया जाए।
🌸 आज और कल
ट्रस्ट की नींव 2016 में रखी गई थी, परंतु आज यह संस्था केवल एक गोशाला नहीं, बल्कि गौसेवा का तीर्थ – खारिया गोतीर्थ बन चुकी है। यह स्थान सतत् गौसंरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और भारतीय संस्कृति के पुनर्जीवन का प्रतीक है।
हमारा लक्ष्य है – भारत और विश्व को यह संदेश देना कि गोमाता का संरक्षण केवल धार्मिक आस्था का प्रश्न नहीं, बल्कि मानवता और भविष्य की पीढ़ियों की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार है।